भारत की आर्थिक रणनीतियाँ: विकास, स्थिरता और वैश्विक पुनर्संतुलन की दिशा में एक बहुआयामी यात्रालेखक: देवांश्श मेहता
इक्कीसवीं सदी के तीसरे दशक में भारत की अर्थव्यवस्था एक ऐसे निर्णायक मोड़ पर खड़ी है जहाँ विकास, स्थिरता, समावेशन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन स्थापित करना केवल नीतिगत विकल्प नहीं, बल्कि राष्ट्रीय अनिवार्यता बन चुका है। कोविड-19 महामारी के झटकों, भू-राजनीतिक तनावों, आपूर्ति-श्रृंखला व्यवधानों और जलवायु परिवर्तन जैसी बहुस्तरीय चुनौतियों के बीच भारत ने जिस प्रकार अपनी आर्थिक…
